चलो इंसानियत की राह : Hindi Poem

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Dhanpat Hindi Poem

Chalo Insaniyat ki Raah Hindi Poem

गलतियों से सीखने की तुझमे भी समझ है।
मगर समझते तुम भी नहीं हम भी नहीं।

ये माना झांक लेंगे हम दोनों अपने अंदर।
मगर ये दुनिया ऐसी है कि झाँकने तुझे भी नहीं देती मुझे भी नहीं ।

ये माना के मुद्दा मजहब का है।
मगर इंसानियत की राह चलता मैं भी नहीं और तू भी नहीं।

आज तीसरा विश्व- युद्ध छिड़ सकता है,
मगर ये समझता तू भी नहीं और मैं भी नहीं।

एक दिन मजहब के खेल में जल जायेगा ये जहाँ।
सच कहूँ बचेगा तू भी नहीं और में भी नहीं।

अगर है समझ तो बचालो ये जहाँ।
जलती रहेंगी कितनी पीढ़ी ये जानता है सारा जहाँ
ना समझो इस बात को जापान की हिस्ट्री करती है बयां।
ये बात हम भी समझ गए और समझलो तुम भी ।

 Dhanpat Saini (Sohna, Haryana)

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