Moral Hindi Story चन्दन की सुगंध

चन्दन की सुगंध Moral Story

हकीम लुकमान ने एक दिन अपने बेटे को पास बुलाकर धूपदान की ओर इशारा किया। इशारे को समझ बेटा धूपदान में से एक मुट्ठी चंदन का चूरा ले आया। फिर लुकममान ने दूसरा इशारा किया। इशारा समझ बेटा दूसरे हाथ में चूल्हे में से कोयला ले आया। लुकमान ने फिर इशारा किया कि दोनों को फेंक दो।

बेटे ने दोनों को फेंक दिया। लुकमान ने बेटे से जानना चाहा कि अब उसके हाथों में क्या हैं? बेटे ने बातया कि दोनों हाथ खाली है। लुकमान ने कहा, ऐसा नहीं है। अपने हाथों को गौर से देखो। बेटे ने अनुभव किया कि जिस हाथ में चंदन का चूरा था, वह अब भी खुशबू बिखेर रहा है और जिस हाथ में कोयला रखा था, उसमें अब भी कालिख नजर आ रही थी।

लुकमान ने कहा, बेटा, चंदन का चूरा अब भी तुम्हारे हाथ में अब चंदन नहीं है कोयले का टुकड़ा तुमने हाथ में लिया तो तुम्हारा हाथ काला हो गया और उसे फेंक देने के बाद भी हाथ काला है इसी तरह दुनिया में कुछ लोग चंदन की तरह होते हैं, जिनके साथ जब तक रहो तब तक हमारा जीवन महकता रहता हे। और उनका साथ छूट जाने पर भी वह महक हमारे साथ जीवन में जुड़ी रहती है। दूसरे ऐसे होते हैं जिनके साथ रहने से भी और साथ छूटने पर भी जीवन कोयले की तरह कलुषित होता है।

यदि आप दक्ष और प्रतिष्ठित लोगों से जुड़े हैं, तो आपको यह बताने में गर्व महसूस होता होगा कि मैं फलां व्यक्ति के साथ कमा कर रहा हूँ, सामने वाले पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता हे। दूसरी ओर कम प्रतिष्ठित लोगों के साथ काम करने पर आपकी छवि भी वैसी ही बन जाती है, भले ही आप बहुत प्रतिभाशाली हो। कोशिश यही करें कि अपने फील्ड के प्रतिष्ठित लोगों के साथ ही काम करें, ताकि न केवल ज्यादा से ज्यादा सीख सकें, बल्कि आपकी अच्छी ब्रांडिंग भी हो।

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