Homeopathy Medicine विभिन्न औषधी से रोग का उपचार

1. ऐसेटिक ऐसिड- टी.बी. के रोगी को रात में सोते समय बहुत ज्यादा पसीना आता हो जिसके कारण उसका पूरा शरीर भीग जाता है। रोगी के बाएं गाल पर लाल-लाल निशान से पड़ जाना, ठण्डा पसीना आने जैसे लक्षणों में ऐसेटिक ऐसिड औषधि लाभकारी रहती है। ये औषधि रोगी को बार-बार नहीं देनी चाहिए।

2. कैलकेरिया-कार्ब- रोगी को रात में सोते समय सिर, गर्दन और छाती में बहुत ज्यादा पसीना आना, बच्चों के सिर में बहुत ज्यादा पसीना आता है जिसके कारण उसका पूरा तकिया पसीने से भीग जाता है। अगर रोगी के शरीर के किसी खास अंग में या पूरे शरीर में पसीना आता है, गांठें सूज जाती हैं, रोगी की हालत रिकेटस के रोगी जैसी हो जाती है। इस तरह के लक्षणों में कैलकेरिया-कार्ब औषधि की 6X मात्रा या 30 या 200 शक्ति लाभकारी रहती है।

3. चायना- रोगी को रात में कमजोरी लाने वाला पसीना आना, जरा सी भी मेहनत करते ही रोगी का पूरा शरीर पसीने में भीग जाना खासकर शरीर के किसी एक अंग का जैसे लक्षणों में चायना औषधि की 30 शक्ति लाभकारी रहती है।

4. मर्क-सोल- रोगी को भोजन हजम न हो पाने के कारण या पित्त की प्रबलता के कारण बुखार होने पर रात के समय बहुत ज्यादा पसीना आता हो। बुखार होने पर दिन या रात में बहुत ज्यादा पसीना आना लेकिन फिर भी उसका बुखार कम नहीं होता। ऐसे लक्षणों में अगर रोगी को मर्क-सौल औषधि की 30 शक्ति दी जाए तो रोगी के लिए लाभकारी होती है।

5. पाइलोकारपस- रोगी के शरीर के हर अंग का पूरी तरह पसीने में भीग जाना, चेहरे पर पूरी तरह से पसीना आना जैसे लक्षणों में पाइलोकारपस औषधि की 30 शक्ति लाभ करती है। टी.बी. के रोगियों को रात में बहुत ज्यादा पसीना आने में इस औषधि को लिया जा सकता है।

6. पिक्रोटौक्सीन- अगर रोगी को मिर्गी या लकवा रोग के कारण रात में बहुत ज्यादा पसीना आता है तो उस समय पिक्रोटौक्सीन औषधि की 3 शक्ति बहुत लाभकारी रहती है।

7. सैलिक्स-नाइग्रा- अगर किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा पसीना आने का रोग हो और उसको किसी औषधि से लाभ ना हुआ हो तो उसे सैलिक्स-नाइग्रा औषधि के रस की 20-25 बूंदें दिये जाना लाभकारी रहता है।

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