Hindu Muslim Sikh Isaiah hindi poem

नमस्कार दोस्तों मैं Dhanpat saini कोई Profssional Writter नहीं हूँ , जब भी जाति और धर्म के नाम पर लड़ते देखता हुईं तो  मेरा खून खौल जाता हैं ! लोग कहते हैं कलम में बड़ी सकती होती हैं सभी लोगो के बीच भेद भाव मिटाने की एक छोटी सी मुहीम में आपका भी साथ चाहिए  इसलिए इसे अपने देस्तो के साथ जरुर शेयर करे मैं सदा आपका आभारी रहूँगा ! पेश हैं छोटी सी कविता.

Hindu Muslim Sikh Isaiah hindi Poem हिंदी कविता

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ना हिन्दू बनना चाहूँगा
ना मुस्लमान बनना चाहूँगा
ना सिख, ना इशाई बनना चाहूँगा
मैं अगर बनना चाहूँगा
तो सिर्फ इंसान बनना चाहूँगा
ना मैं होली पूजना चाहूँगा
ना दीवाली मनाना चाहूँगा ।।

ना मैं बकरीद मनाना चाहूँगा
ना मैं मोहर्रम मनाना चाहूँगा
ना सिक्खो का धर्म मैं चाहूँगा
ना ईसाईयो का क्रिश्मस मनाना चाहूँगा
मज़हब के नाम पर इशी तरह लड़ते रहे
तो मैं मजहब को ही भूल जाऊंगा।।

अंग्रेजो ने लड़वाया पूर्वजो को
200 साल गुलाम बनाया था
कुछ माँ के सेवको ने अपना
जीवन बलिदान कराया था
सन् 47 मैं आजादी को
अंग्रेजो ने काँटों पर सजाया था।।

जब सत्ता के लालचियों ने
मज़हब का खून बहाया था
आज़ाद भारत मैं भी सत्ता की खातिर
84 के दंगो, फिर बाबरी मस्जिद
गोधरा काँड को भड़काया था
नेताओ ने इंसानियत को
सूली पर लटकाया था।।

आज फिर नेताओ पर
सीधा इलज़ाम आया है
दादरी में इंसानियत को
सूली पर लटकाया है
नेताओ ने एक दूसरे मजहब
पर सीधा इलज़ाम लगाया है।।Hindu Muslim Sikh Isaiah hindi poem

अपनी सफाई की एक चिट्ठा
UNO तक पहुँचाया है
चुनावी तीर चला रहे नेता
सियासत का जाल फैलाया है
एक इंसानियत की मिट्टी पर
देखो कैसा ज़हर उड़ाया हैं।।Hindu Muslim Sikh Isaiah hindi poem

अरे जाग उठो अब भारतवासी
एक नया सवेरा लाओ तुम
भूल जाओ अब मज़हब के झगड़े,
सिर्फ इंसानियत को अपनाओ तुम।
इंसान बनो नयी पहचान बनो।।

इंसानियत को धर्म बनाओ तुम
ना झगड़ा हो फिर मजहब का
मज़हब को भूल जाओ तुम
हम सब इंसान हैं सिर्फ
इंसानियत को अपनाओ तुम ।।

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