एड्स की जानकारी

परिचय-
बहुत से लोग एड्स को छूने से फैलने वाला रोग मानते हैं जिसके कारण वह एड्स के रोगी को अपने पास आने से या छूने से भी डरते हैं जो कि सही नहीं है। बल्कि कोई व्यक्ति जब बिना किसी सावधानी के कई लोगों के साथ यौन-सम्बंध स्थापित करता है, डॉक्टर जब पहले इस्तेमाल की हुई सुई को दूसरे व्यक्ति को लगा देता है या एच. आई. वी. संक्रमण रोगी का खून जब दूसरे व्यक्ति को चढ़ाया जाता है तो एड्स का रोग हो जाता है। एड्स का रोग एच. आई. वी. संक्रमण के कारण फैलता है।

कारण-

एड़स रोग होने का मुख्य कारण असुरक्षित यौन-संबध है।
एक से ज्यादा स्त्री या पुरुषों के साथ असुरक्षित यौन-सम्बंध बनाने से एड्स का रोग फैल जाता है।
अगर एच.आई.वी. संक्रमण के रोगी का खून किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में चढ़ाया जाता है तो इससे एड्स का रोग फैल जाता है।
एड्स की रोगी स्त्री के द्वारा उसके होने वाले बच्चे में एड्स फैल जाता है।
चिकित्सक द्वारा एक व्यक्ति को लगाया हुआ इंजैक्शन दूसरे व्यक्ति को लगाने से एड्स का रोग फैल जाता है।

लक्षण-

एड्स रोग के लक्षणों में रोगी को हर समय हल्का-हल्का सा बुखार रहता है।
रोगी को दस्त होते रहते हैं।
दिन पर दिन रोगी का वजन कम होते जाता है।
रोगी को भूख लगना बंद हो जाती है।
रोगी को खांसी होने लगती है और बलगम के साथ खून भी आ जाता है।
रोगी को छाती में दर्द रहता है या उसे बार-बार छाती का कोई न कोई रोग घेर लेता है।

सावधानी-

संभोगक्रिया के समय हमेशा कण्डोम आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
एड्स से पीड़ित व्यक्ति को अपने शरीर का कोई भाग या खून आदि किसी को भी नहीं देना चाहिए।
किसी भी डॉक्टर आदि से इंजैक्शन आदि लगवाने से पहले ये देख लें कि वह सीरिंज या इंजैक्शन पहले प्रयोग किया हुआ तो नहीं है।
एड्स से पीड़ित रोगी स्त्री को अपने बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाना चाहिए।
हॉस्पिटल आदि में अगर खून चढ़वाया जाता है तो पहले डाक्टर से उस खून की एच. आई. वी टेस्ट की जांच रिर्पोट देख लें।

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