Khalil Gibran Famous Qutes in Hindi खलील जिब्रान

Khalil Gibran खलील जिब्रान

  • मैं तुमसे प्रेम करता हूँ जब तुम अपने मस्जिद में झुकते हो , अपने मंदिर में घुटने टेकते हो , अपने गिरजाघर में प्रार्थना करते हो। क्योंकि तुम और मैं एक ही धर्म की संतान हैं , और यही भावना है .
  • और क्या कभी यह जाना गया है कि प्रेम स्वयं अपनी गहराई जानता है जब तक कि बिछड़ने का वक़्त ना आये?
  • मित्रता हमेशा एक मधुर ज़िम्मेदारी है, अवसर कभी नहीं.
  • ज्ञान ज्ञान नहीं रह जाता जब वह इतना अभिमानी हो जाए कि रो भी ना सके, इतना गंभीर हो जाए कि हंस भी ना सके और इतना स्वार्थी हो जाये कि अपने सिवा किसी और का अनुसरण ना कर सके .
  • एक दोस्त जो बहुत दूर है वो कभी कभी करीब रहने वालों से अधिक नज़दीक होता है . क्या पहाड़ , वहां रहने वालों की अपेक्षा घाटी से गुजरने वालों को कहीं अधिक प्रेरणादायी और स्पष्ठ नहीं दिखता ?
  • जो शिक्षक वास्तव में बुद्धिमान है वो आपको अपने ज्ञान प्रकोष्ठ में प्रवेश करने का आदेश नहीं देता बल्कि वो आपको आपके बुद्धि की पराकाष्ठा तक ले जाता है .
  • मैंने बातूनियों से शांत रहना सीखा है , असहिष्णु व्यक्तियों से सहनशीलता सीखी है , निर्दयी व्यक्तियों से दयालुता सीखी है ; पर फिर भी कितना अजीब है कि मैं उन शिक्षकों का आभारी नहीं हूँ .
  • अगर मेरा अस्तित्व किसी के नष्ट होने का कारण बनता है तो मौत मुझे अधिक आकर्षक और प्रिय होगी .
  • आप कैसे जीते हैं ये ज़िन्दगी आपको क्या देती है इससे अधिक आप अपनी ज़िन्दगी को क्या नजरिया देते हैं इसपर निर्भर करता है ; जितना आपकी ज़िन्दगी में क्या हुआ इससे अधिक जो हुआ उसे आप कैसे देखते हैं इसपर निर्भर करता है .
  • दोस्ती की मिठास में हास्य और खुशियों का बांटना होना चाहिए . क्योंकि छोटी -छोटी चीजों की ओस में दिल अपनी सुबह खोज लेता है और तरोताज़ा हो जाता है .

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