Meri Kala Best Hindi Poem मेरी कला

मैँ तो एक कलम था छोटी सी मगर शब्द बनकर साथ सारे चले।
मेरे आगे ना था रास्ता कोई मेरे पीछे मगर सारे चले।।

मैँ कोई सूरज तो नहीँ था के पीछे मेरे चांद और तारे चले।
मैँ कोई समुन्दर भी तो नहीँ था के साथ मेरे प्यासे और किनारे चलेँ।।

मैँ तो बारिश की एक बूंद था।
जो बहकर औरोँ के संग नहर- नदी और फिर सागर बना दिया।।

meri kalam kavita

मैने तो एक जुर्म किया था, पहल करने का जिसे तुमने कानून बना दिया।
मुझे तो एहसास भी नहीँ था मेरी इस कला का, तुमने मुझे उस लायक बना दिया।।

मुझ मेँ तो हिम्मत ही क्या थी बिन साथ तुम्हारे।
मेरी तो हस्ती ही क्या थी बिन हौसलोँ के तुम्हारे तेरे हौसले मेरी हिम्मत को यूँही बढ़ाते चलेँ ।।

मैँ तो एक कलम था छोटी सी मगर शब्द बनकर साथ सारे चले।
मेरे आगे न था रास्ता कोई पीछे मगर सारे चले।।

Meri Kala Best Hindi Poem

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