Pundit Deendayal Upadhyaya Famous Qutes in Hindi पण्डित दीनदयाल उपाध्याय

Pundit DeendayalUpadhyayaपण्डित दीनदयाल उपाध्याय

  • मानव प्रकृति में दोनों प्रवृत्तियां रही हैं – एक तरफ क्रोध और लोभ तो दूसरी तरफ प्रेम और त्याग .
  • नैतिकता के सिद्धांत किसी के द्वारा बनाये नहीं जाते , बल्कि खोजे जाते हैं .
  • अंग्रेजी शब्द रिलिजन, धर्म के लिए सही शब्द नहीं है .
  • धर्म एक बहुत व्यापक विचार है जो समाज को बनाये रखने के सभी पहलुओं से सम्बंधित है .
  • धर्म के मूल सिद्धांत शाश्वत और सार्वभौमिक हैं. हालांकि , उनका क्रियान्वन समय , स्थान और परिस्थितियों के अनुसार अलग -अलग हो सकता है .
  • एक देश लोगों का समूह है जो ‘एक लक्ष्य ‘, ‘एक आदर्श ‘, एक मिशन ‘ के साथ जीते हैं , और धरती के एक टुकड़े को मात्रभूमि के रूप में देखते हैं . यदि आदर्श या मात्रभूमि – इन दोनों में से एक भी नहीं है तो देश का कोई अस्तित्व नहीं है .
  • भारत में नैतिकता के सिद्धांतों को धर्म कहा जाता है – जीवन जीने की विधि.
  • जब स्वाभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है , तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं .
  • एक बीज , जड़ों , तानों , शाखाओं , पत्तियों , फूलों और फलों के रूप में अभिवयक्त होता है . इन सभी के अलग -अलग रूप , रंग और गुण होते हैं . फिर भी हम बीज के माध्यम से उनकी एकता के सम्बन्ध को पहचानते हैं .
  • जब राज्य सभी शक्तियों , दोनों राजनीतिक और आर्थिक का अधिग्रहण कर लेता है , तो इसका परिणाम धर्म का पतन होता है .
  • यहाँ भारत में , हमने अपने समक्ष मानव के समग्र विकास के लिए शरीर , मन , बुद्धि और आत्मा की आवश्यकताओं की पूर्ती करने की चार -स्तरीय जिम्मेदारियों का आदर्श रखा है
  • धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष ( चार पुरुषार्थ ) की लालसा मनुष्यों में जन्मजात होती है और समग्र रूप में इनकी संत्सुष्टि भारतीय संस्कृति का सार हैं .


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