Pundit Deendayal Upadhyaya Popular Qutes in Hindi पण्डित दीनदयाल उपाध्याय

Pundit DeendayalUpadhyayaपण्डित दीनदयाल उपाध्याय

  • ये ज़रूरी है कि हम ‘ हमारी राष्ट्रीय पहचान ‘ के बारे में सोचें जिसके बिना ‘स्वतंत्रता ‘ का कोई अर्थ नहीं है .
  • भारत जिन समस्याओं का सामना कर रहा है उसका मूल कारण इसकी ‘राष्ट्रीय पहचान ‘ की उपेक्षा है .
  • अवसरवाद ने राजनीति में लोगों के विश्वास को हिला कर रख दिया है .
  • किसी सिद्धांत को ना मानने वाले अवसरवादी हमारे देश की राजनीति नियंत्रित करते हैं .
  • In Hindi 6: हम लोगों ने अंग्रेजी वस्तुओं का विरोध करने में तब गर्व महसूस किया था जब वे (अंग्रेज ) हम पर शाशन करते थे , पर हैरत की बात है , अब जब अंग्रेज जा चुके हैं , पश्चिमीकरण प्रगति का पर्याय बन चुका है .
  • पश्चिमी विज्ञान और पश्चिमी जीवन दो अलग -अलग चीजें हैं. जहाँ पश्चिमी विज्ञान सार्वभौमिक है ; और यदि हमें आगे बढ़ना है तो इसे हमारे द्वारा अवश्य अपनाया जाना चाहिए , वहीँ पश्चिमी जीवन और मूल्यों के बारे में ये बात सत्य नहीं है .
  • पिछले एक हज़ार वर्षों में हमने जो भी आत्मसात किया चाहे वो हम पर थोपा गया या हमने स्वेच्छा से अपनाया – उसे अब छोड़ा नहीं जा सकता .
  • मानवीय ज्ञान आम संपत्ति है .
  • शक्ति हमारे असंयत व्यवहार में नहीं बल्कि संयत कारवाई में निहित है.
  • अनेकता में एकता और विभिन्न रूपों में एकता की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की सोच रही है .
  • स्वतंत्रता तभी सार्थक हो सकती है यदि वो हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बन जाए.
  • भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता है कि यह जीवन को एक एकीकृत समग्र रूप में देखती है .
  • वहां जीवन में विविधता और बहुलता है लेकिन हमने हमेशा इसके पीछे की एकता को खोजने का प्रयास किया है.
  • मुसलमान हमारे शरीर का शरीर और खून का खून हैं .

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