Sri Sri Ravi Shankar Best Qutes in Hindi श्री श्री रवि शंकर

Sri Sri Ravi Shankar श्री श्री रवि शंकर अनमोल विचार

  • मैं आपसे बताता हूँ, आपके भीतर एक परमानंद का फव्वारा है, प्रसन्नता का झरना है. आपके मूल के भीतर सत्य,प्रकाश, प्रेम है, वहां कोई अपराध बोध नहीं है, वहां कोई डर नहीं है. मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा.
  • प्रेम कोई भावना नहीं है. यह आपका अस्तित्व है.
  • “आज” भगवान का दिया हुआ एक उपहार है- इसीलिए इसे “प्रेजेंट” कहते हैं.
  • जब आप अपना दुःख बांटते हैं , वो कम नहीं होता. जब आप अपनी ख़ुशी बांटने से रह जाते हैं, वो कम हो जाती है.अपनी समस्याओं को सिर्फ ईश्वर से सांझा करें , और किसी से नहीं, क्योंकि ऐसा करना सिर्फ आपकी समस्या को बढ़ाएगा.अपनी ख़ुशी सबके साथ बांटें.
  • श्रद्धा यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा जाते हैं जिसकी आपकी ज़रुरत होती है.
  • मानव विकास के दो चरण हैं- कुछ होने से कुछ ना होना;और कुछ ना होने से सबकुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है.
  • दूसरों को सुनो ; फिर भी मत सुनो . अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्याओं में उलझ जाएगा, ना सिर्फ वो दुखी होंगे , बल्कि तुम भी दुखी हो जओगे.
  • जीवन ऐसा कुछ नहीं है जिसके प्रति बहुत गंभीर रहा जाए . जीवन तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है . गेंद को पकड़े मत रहो.
  • हमेशा आराम की चाहत में , तुम आलसी हो जाते हो. हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो.हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो.
  • किसी ऐसे से प्रेम करना जिसे तुम चाहते हो नगण्य है किसी से इसलिए प्रेम करना क्योंकि वो तुमसे प्रेम करता है महत्त्वहीन है .किसी ऐसे से प्रेम करना जिसे तुम नहीं चाहते , मतलब तुमने जीवन का एक सबक सीख लिया है .किसी ऐसे से प्रेम करना जो बिना वजह तुम पर दोष मढ़े; दर्शाता है कि तुमने जीने की कला सीख ली है .
  • एक निर्धन व्यक्ति नया साल वर्ष में एक बार मनाता है . एक धनाड्य व्यक्ति हर दिन . लेकिन जो सबसे समृद्ध होता है वह हर क्षण मनाता है .
  • बुद्धिमान वो है जो औरों की गलती से सीखता है. थोडा कम बुद्धिमान वो है जो सिर्फ अपनी गलती से सीखता है.मूर्ख एक ही गलती बार बार दोहराते रहते हैं और उनसे कभी सीख नहीं लेते.
  • अपने कार्य के पीछे की मंशा को देखो . अक्सर तुम उस चीज के लिए नहीं जाते जो तुम्हे सच में चाहिए .


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