Sri Sri Ravi Shankar Famous Qutes in Hindi श्री श्री रवि शंकर

Sri Sri Ravi Shankar श्री श्री रवि शंकरके अनमोल विचार

  • यदि तुम लोगों का भला करते हो , तुम अपनी प्रकृति की वजह से करते हो .
  • तुम्हारा मस्तिष्क भागने की सोच रहा है और उस अस्तर पर जाने का प्रयास नहीं कर रहा है जहाँ गुरु ले जाना चाहते हैं , तुम्हे उठाना चाहते हैं .
  • चाहत , या इच्छा तब पैदा होती है जब आप खुश नहीं होते . क्या आपने देखा है ? जब आप बहुत खुश होते हैं तब संतोष होता है . संतोष का अर्थ है कोई इच्छा ना होना .
  • इच्छा हमेशा मैं पर लटकती रहती है . जब स्वयं मैं लुप्त हो रहा हो , इच्छा भी समाप्त हो जाती है , ओझल हो जाती है .
  • तो क्या अगर कोई तुम्हे पहचानता है : ओह, तुम एक शानदार व्यक्ति हो . तो क्या ? उस व्यक्ति के दिमाग में वो विचार आया और गया . वह भी ख़त्म हो गया . वो विचार चला गया . हो सकता है कि कुछ दिन , कुछ महीने वो तुम्हारे प्रति आकर्षित रहे , तो क्या ? वो भी चला जाता है , ये भी चला जाता है .
  • स्वयं अध्यन कर के , देख कर , खोखले और खली होकर , तुम एक माध्यम बन जाते हो – तुम परमात्मा का अंश बन जाते हो . तुम देवत्त्व की उपस्थिति को महसूस कर सकते हो . सभी स्वर्गदूत और देवता , हमारी चेतना के ये विभिन्न रूप खिलने लगते हैं .
  • हर एक चीज के पीछे तुम्हारा अहंकार है : मैं , मैं , मैं , मैं . लेकिन सेवा में कोई मैं नहीं है , क्योंकि यह किसी और के लिए करनी होती है .
  • दूसरों को आकर्षित करने में काफी उर्जा बर्वाद होती है . और दूसरों को आकर्षित करने की चाहत में – मैं बताता हूँ , विपरीत होता है .
  • तुम्हारे अन्दर कोई भावना आई , अप्रिय भावना , और तुमने कहा , नहीं आणि चाहिए , ये फिर से नहीं आनी चाहिए . ऐसा करके तुम उसका विरोध कर रहे हो .जब तुम विरोध करते हो , वो कायम रहती है . बस देखो , ओह ! उसकी गहराई में जाओ . नाचो ; अपने पैरों पर खड़े हो और नाचो . मस्ती में रहो ; मस्ती में चलो .
  • ज्ञान बोझ है यदि वह आपके भोलेपन को छीनता है .ज्ञान बोझ है यदि वह आपके जीवन में एकीकृत नहीं है .ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता नही लाता .ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है कि आप बुद्धिमान हैं . ज्ञान बोझ है यदि वह आपको स्वतंत्र नहीं करता .ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह प्रतीत कराता है कि आप विशेष हैं

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